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दुपहरकेँ करिब दू बाजि रहल छलै, हमरालोकनि लमजुङ जिलाक मुख्यालय बेसी शहरसँ आगाँ बढ़ि रहल छलौँ । शहरक चहलपहलकेँ पाछाँ छोड़ैत हमरासभक गाड़ी क्रमशः पहाड़ी घुम्ती होइत चढ़ाइ चइढ़ रहल छलै । मर्स्याङदी नदीक किनारेकिनार आगाँ बढ़ैत काल गाड़ीक खिड़कीसँ देखाएबला दृश्य एतेक मनमोहक जे व्याख्या कठीन । नदीक तीव्र बहाव आ चारू बगल पसरल हरियरी—ई वातावरण यात्राकेँ रोमाञ्चक बना रहल छलै ।

बेसी शहर छोड़लाक बाद हमरालोकनि आब लमजुङक मर्स्याङदी गाउँपालिकामे यात्रा कऽ रहल छलौँ । बगैंचा नामक स्थानके बाद खुदी बजार आइब गेल छलै । मर्स्याङदी कातमे अवस्थित ई छोट बजार आकर्षक अछि । खुदी बजारमे रहल पुलपरसँ गाड़ी मर्स्याङदी नदीक दोसर कात पहुँचल । कनिए कालके बाद एकटा छोटसन पहाड़ी नदीके पार करैत हमरालोकनि भुलभुले नामक छोट बजार पहुँचि गेल छलौँ ।

ओह ! ई कि ? गाड़ी खराब भऽ गेलै । दोसर गाड़ी आबैधरि, समयके सदुपयोग करैत हमरालोकनि चाहपान कएलाैँ । करिब ४५ मिनटके बाद गाड़ी आएल आ हमरालोकनि पुनः यात्रा प्रारम्भ कएलाैँ । खुदी आ भुलभुलेसन जगहसब स्थानीय संस्कृतिके झलक देबऽबला छोट मुदा सन्दर गामसभ अछि ।

यात्रा टोलीमे पत्नी मुन्नी, जेठकी बेटी कृतिका, नाइत इभान, हमर सहकर्मीद्वय नवीन पौडेल आ यादव गोतामे सम्मिलित छलौं, आ हमर तँ कोनो बाते नइँ भेल । हमसभ आइ (२०८२ साल फागुन २९ गते) मनाङके ‘गेटवे’ मानल जाएबला बेसी शहर (करिब ७६० मिटर) सँ ६५ किलोमिटरके दूरीमे रहल मनाङके मुख्यालय चामे (करिब २७६० मिटर)जा रहल छलौँ । एहि हिसाबे देखी तँ रस्तामे दू हजार मिटरके उँचाई पार करबाक छलै । मनाङ जिला आ मुख्यालय चामे नेपालक पर्यटकीय दृष्टिसँ अत्यन्त महत्वपूर्ण अछि । हिमाली जिला मनाङ अन्नपूर्ण क्षेत्रके पदयात्रा, नेपालक सबसँ उँचाईमे रहल ताल (करिब ५००० मिटर), प्रसिद्ध थोराङला पास आदिक कारण विश्व प्रसिद्ध अछि आ इएह कारण छै जे विश्वभरिसँ पर्यटकसभ पदयात्रा हेतु एतऽ आबै छथि । अनेको पर्यटक बेसी शहरेसँ पदयात्रा प्रारम्भ करैत छथि तँ अनेकौं पदयात्री तालगाउँ आ चामेसँ यात्रा शुरू करैत छथि । एखन रस्तामे सेहो देखलियै जे किछु विदेशी पर्यटक पदयात्रा कऽरहल छलथि ।

मनाङके सड़क बनबैत मैथिली भाषी श्रमिक

गाड़ी आगाँ बढ़ि रहल छलै । ठामठाम सड़क निर्माणाधीन छै । काज भ रहल छलै । ठामठाम श्रमिकसभ काजमे सक्रिय छलथि । आई एतऽ कार्यरत इएह श्रमिकसभक योगदानके कारणेँ कल्हुका दिनमे सर्वसाधारण ई रस्ताक नीक प्रयोग कऽ सकत । हमर गाड़ीक खिड़की खुजल छलै । हम एकठाम किछु श्रमिककेँ आपसमे बात करैत सुनलियै । हमरा बुझाएल जेना ओसभ मैथिली बाजि रहल छलथि । हमर कान ठाड़ भ गेल रहए । विकट हिमाली जिला मानल जाएबला मनाङ पहुँचबाक कार्यकेँ सहज बनेबाक उद्देश्यसँ सड़कमे रोजगारीक सन्दर्भमे काज क रहल मैथिल भाषी श्रमिक ! आश्चर्य लागल । हम गाड़ीकेँ रोकएलाैँ आ हुनकासभसँ बात करबाक प्रयास कएलाैँ । जानकारी भेटल जे, रौतहट आ सर्लाहीक करिब बीससँ पच्चीस साल उमेर समूहक अनेकों युवा एतऽ कार्यरत छथि ।

हम एकगोटेके पुछलियैन
—कि नाम अछि ?

-प्रदीप
-घर ?
-रौतहट चन्द्रनिगाहपुर
-एतऽ किए एलौँ ?
-इएह काज करए
-काज करबाक लेल एतऽ ? ई विकट जगहमे ? एहन काज गामघरदिस नइँ कऽ सकै छी ?
-कहाँ भेटै छै ओम्हर काज ? जँ भेटल रहितै तँ ई पहाड़पर किए अबितियै ?
-केना एलियै एतऽ ?
-ठेकेदार झूठ बाइज कऽ अनलक ? एहन जगह है से जे बुझल रहैत तँ नइँ ऐती ।

प्रदीपेसन बात दोसर युवा धीरज आ अजयकेँ सेहो छलनि । एकटा बात तँ तय छल जे ओसभ एतऽ स्वेच्छासँ नइँ आएल रहथि । हुनकासभक मोताबिक भोर सात बजेसँ अबेर साँझधरिके काज सत्ते बड़ भरिगर आ जोखीमपूर्ण छै । बुझाएल जे ओसभ काजसँ सन्तुष्ट नइँ छथि । अवस्था देखलाक बाद असन्तोष तँ हमरो मोनमे उत्पन्न भेल रहए । अपने गामघरमे जँ रोजगार उपलब्ध रहितै तँ सामान्य पारिश्रमिक हेतु ई युवासभ एतऽ किए आबितथि ?

प्रसिद्ध बुङ आ अक्टोपस झरना

हमसभ आगाँ बढ़ि रहल छलौँ । किछु समयक बाद लमजुङ जिलाके मर्स्याङदी गाउँपालिका—४ स्थित प्रसिद्ध बुङ झरना रहल स्थानमे आबि गेल छलौँ । अत्यन्त आकर्षक । पानिके फोहराक कारण चारूदिस किछु ठण्ढा हवा पसरलसन बुझएल । एखनधरि हम ज्याकेट नइँ पहिरने छलौं, मुदा एतऽ आबि ज्याकेट धारण करब बाध्यता बुझाएल ।

गाड़ीसँ उतैर कनेकाल झरनाक दृश्यपान कएलाैँ । लागल जेना, यात्राक थकान हरा गेल हुअए । कनेकाल ओतऽ विलमि फोटो खिचा झरनाक सौन्दर्यकेँ मोनमे सहेजि पुनः गन्तव्यदिस अग्रसर भेलौँ । कनिए आगाँ बढ़लाक बाद आएल दोसर झरना । एकर नाम छै अक्टोपस । पछिला दिनमे ई झरना अत्यन्त चर्चित अछि । सामाजिक सञ्जालमे तँ ई भाइरल भेल छै । एकर नामे विचित्रसन छै—अक्टोपस । अक्टोपस एक एहन समुद्री जीव, मानल जाइत छै जे एकर आठटा पएर आ तीनटा हृदय होइत छै । ई झरना एहने विचित्र छै । विभिन्न धारामे विभाजित भ पानि झहरएबला ई झरना अक्टोपसेक पएरजकाँ पसरलसन बुझाइत छै । दृश्य ठिके अद्भुत छलै । प्रकृतिक कलात्मक कलाकारिता झलैक रहल छलै ।

यात्रा आगाँ बढ़ैत काल हमरालोकनिकेँ मर्स्याङ्दी नदीकेँ कखनो नजदिकसँ कखनो दूरसँ आ कखनो उँचाईसँ देखबाक अनेक अवसर भेटल छलै । मानल जाइत छै, मर्स्याङ्दी नेपालेक सबसँ तीव्र धार(करेन्ट)रहल नदी छै । कतौ ई शान्त भ बहैछ तँ कतौ तीव्र गतिमे बहैत चट्टानपर बजरैत गरजैतसन सुनाए पड़ि रहल छलै ।

मार्दी नदीक पार छै मनाङ

कनेक आगाँ बढ़लाक बाद आएल म्यार्दी (मार्दी) नदी । छोटछिन इएह नदी लमजुङ आ मनाङके सीमा विभाजित करैत अछि । पुल पार कएलाक बाद हमरालोकनि छलौँ मनाङ जिलामे । हम अपन उत्साह आ अनुभूतिक वर्णन एतऽ नइँ कऽ सकै छी ।आइ नेपालक ७५म जिलामे पदार्पण कएने छलौँ । नयाँ उत्साहक सञ्चार तँ स्वाभाविके ने । आब एकरबाद नेपालक दू जिला डोल्पा आ हुम्ला बाँकी रहि गेल जतऽ हमरा जेबाक अछि ।


यात्राक क्रममे तालगाउँ पहुँचि गेल छलौँ । अत्यन्त सुन्दर छै ई गाम । मर्स्याङदी किनारमे बैसल ई गाम २०७८ सालमे बहुत चर्चामे आएल छलै । मर्स्याङ्दी नदीमे आएल बाढ़ि पुरे गामकेँ डुबौने छलै । घरके छतपरसँ पानि बहल छलै कहाँदन । ओ विकट अवस्थासँ जुधैत ई गाम आजुक विकसित अवस्था धरि आएल अछि । सलाम अछि तालगाउँके बासिन्दाकेँ ।

अइ गामकेँ दोसर विशेषता सेहो छै, एतऽ राष्ट्रीय प्रशारण लाइनसँ विद्युतक आपुर्ति नइँ होइत छै । एतौका वासिन्दा स्वयं स्थानीय स्तरमे विद्युत उत्पादन कएने छथि आ इएह उत्पादनसँ गाममे विद्युतक आवश्यकताक आपूर्ति होइत छै । समग्रमे तालगाउँ बड़ आकर्षक छै । बेसी शहरसँ पदयात्राहेतु प्रस्थान करएबला प्रायः पर्यटकसभ एतऽ कमसँ कम एक राति व्यतीत करबे करैत छथि । आगाँ बढैतकाल रस्तामे खोत्रे, उपरका (माथिल्लो) आ निचला (तल्लो) धारापानी, दानाक्यु, तिमाङ आदि रमणीय स्थानक अनुभव सहेजबाक अवसर भेटल । धारापानी पहुँचैत पहुँचैत मौसम कने ठण्ढा भ गेल छलै । एतसँ मनाङ क्षेत्रक प्रभाव स्पष्ट अनुभव भ रहल छलै । घरके बनावट, स्थानीय बासिन्दाक पोशाक आ भाषा आदिमे हिमाली संस्कृतिक झलक देखबामे आबऽ लागल छलै ।

जेनाजेना चामे (२७६० मिटर)लगचिया रहल छलै, पहाड़सभ आओर ऊँच आ भव्य देखा रहल छलै । धीरेधीरे हरियरी कम भ रहल छलै । चट्टानी भूभागके आकार बइढ रहल छलै । साँझ हुअ लागल छलै आ सूर्यके स्वर्णिम किरण पहाड़क भितपर पड़बाक दृश्य अत्यन्त मोहक लगै छलै ।

साँझ करिब साढे़ छ बजेदिस हमरालोकनि चामे पहुँचलौँ । यात्रा अत्यन्त सन्तोषजनक रहए । चामे मनाङ जिलाक मख्यालय छै । एतसँ हिमाली क्षेत्रक वास्तविक अनुभव शुरू होइत छै । अइ भूमिपर हमर पहिल अनुभव रहए— अन्नपूर्ण, मनास्लु आ लमजुङ हिमालद्वारा घेरलसन लागैबला मर्स्याङदी किनारमे अवस्थित चामेक ठण्ढा हवा आ शान्त वातावरण यात्राक थकानकेँ अन्त्य कऽ देलक ।

हमर निष्कर्ष अछि— बेसीशहरसँ चामेक यात्रा मात्र दूरी तय करबाक यात्रेटा नइँ छै, प्रकृति, संस्कृति आ विकासक संगम अनुभूत करबाक अद्भुत अवसर सेहो अछि । थकानकेँ अस्वीकार नइँ कएल जा सकैत छलै । हमहुँसभ अपवाद नइँ भऽ सकै छलौँ । एतऽ प्रमुख जिला अधिकारी (सिडिओ) हमर जमाए नवराज पौडेल छथि । आजुक रात्री भोजन आ विश्राम हुनके निवासपर निश्चित अछि ।

भ्रताङ आ पिसाङ: सेवके खेती

दोसर दिन प्रातःकाल शनिदिन करिब साढ़े नओ बजे हमरालोकनि प्रसिद्ध पर्यटकीय स्थल खाङसारदिस प्रस्थान कएलौँ । एखन कृतिका आ इभान यात्रा नइँ कएलनि । यात्राक नेतृत्व कऽ रहल छलथि हमर जमाए अर्थात स्वयं सिडिओ साहब । मर्स्याङ्दी नदीक किनारेकिनार गाड़ीक माध्यमसँ हमरालोकनिकेँ यात्रा आगाँ बइढ़ रहल छलै । करिब एक÷दू किलोमिटर आगाँ बढ़लाक बाद चामे गाउँपालिका समाप्त भ मनाङ ङिस्याङ गाउँपालिका शुरू होइत छै आ एतहिसँ शुरू होइत छै उपल्लो मनाङ अर्थात उपरका (अपर) मनाङ । प्रकृतिक कोरमे प्रकृतिक प्रत्यक्ष स्पर्श अनुभूत होएबला ई यात्रा स्वयंमे अत्यधिक मनोरम आ महत्वपूर्ण छलै ।

हमरा बुझाएल—प्रकृतिक वास्तविक आनन्द जँ लेबाक हुअए तँ ई स्थानसँ उपयुक्त विश्वमे आन कोनो स्थान नइँ भऽ सकैए । शायद ई निष्कर्ष हमरेटा नइँ, अइ मार्गमे पदयात्रा हेतु विश्वके विभिन्न स्थानसँ आबैबला पर्यटककेँ सेहो छनि, तएँ तँ ओसभ विश्वक आन ठाम जाएब छोड़ि एतऽ अबै छथि । हमरालोकनि गाड़ीमे जा रहल छलौं, रस्ताभरि देखलियै जे सयकड़ो विदेशी पर्यटक पदयात्रामे सहभागी छलथि । कने आगाँ बढ़लौं, तालेरहु (२७२०मि) आएल आ तकरबाद आएल भ्रताङ(२८५० मि) । ई स्थान सेव (स्याउ) खेतीक लेल प्रसिद्ध छै । मनाङके सेव विश्वप्रसिद्ध अछि आ मनाङमे एतौका सेव प्रसिद्ध अछि । पछिला समयमे एतऽ सेवके गाछ पुनर्रोपण कएल गेल अछि । एतौका मौसम आ वातावरण सेवके खेतीक अनुकूल अछि । पछिला समयमे इटलीसँ उन्नत प्रजातिके सेव आइन हाइव्रिड प्रविधिसँ खेती कएल जा रहल छै । भ्रताङसँ पिसाङ आ आर उपरका क्षेत्रमे अत्यधिक मात्रामे सेवके खेती होइत छै । एखन सेवके मौसम नइँ छै, तँए गाछसभ उजाड़सन लगै छै । सेवके सिजनमे ई पुरा क्षेत्र गुलजार रहैत छै कहाँदन । भ्रताङमे एक प्रसिद्ध वाइन कारखाना छै । एतऽ सिजनमे नइँ बिकाएल  सेवसँ वाइन उत्पादन कएल जाइत छै । एतौका वाइन प्रसिद्ध अछि ।

स्वर्गद्वारी पहाड़ आ प्राचीन हुन्डे गाम

एतसँ आगाँ बढ़लाक बाद पडै़त छै चर्चित पर्यटकीय स्थल स्वर्गद्वारी— मर्स्याङ्दी किनारमे सपाट चट्टानयुक्त पहाड़ ।
पहाड़ एहन जे एकहिटा पाथरसँ निर्माण भेल छै । मानल जाइत छै जे अइ पहाड़पर वरफ (हिम)सेहो नइँ अइड़ सकै छै । स्थानीय मान्यता छै, ई स्वर्ग जेबाक द्वार छै । स्वर्गद्वारीक बाद अबै छै ढिकुर पोखरि, उपरका आ निचला (माथिल्लो आ तल्लो) पिसाङ ।

हमरालोकनि चामेसँ करिब १७ किलोमिटरके यात्रा तय कऽ हुन्डे आइब चुकल छलौँ । चामेसँ पहिने जिलाक मुख्यालय एक प्रकारे इएह मानल जाइत छलै । एतऽ मर्स्याङ्दी नदी किनारपर बनल हवाइस्थल (एयरपोर्ट) छै । मनाङमे सड़क पहुँचसँ पहिने जिलामे हवाइसेवा सञ्चालनमे छलै । मुदा एत  हवाइसेवा सञ्चालनमे नइँ अछि । हुन्डे अइ क्षेत्रक प्राचीन सभ्यताक केन्द्र मानल जाइत अछि । अनेक स्थानमे भगवान बुद्धके प्रतिमा स्थापित अछि । जँ देखी तँ ई स्थान विगतमे मनाङ सभ्यताक महत्वपूर्ण केन्द्र रहल हएत से सहजे अनुमान लगाओल जा सकैत अछि । अइ क्षेत्रमे अत्यन्त महत्वपूर्ण दूटा ताल अछि—नील पानि देखाएबला ब्लू लेक आ हरियरसन पानि देखाएबला ग्रीन लेक ।

पर्यटकके बीच ई दूनु ताल अत्यन्त लोकप्रीय अछि । स्थानीयसभ ब्लू लेककेँ सिङदे आ सब्जे ताल कहै छथि । हुन्डेमे एक ठाम अद्भुत दृश्य देखाएल । एकटा झरनामे हावामे लटकल बरफ । बड़ दर्शनीय स्थल छलै । हमसभ ओतऽ गेलौं आ बरफसँ कनेकाल खेलेबाक आनन्द उठेलौँ । ओतसँ आगाँ बढ़लाक बाद भुङजे आ भ्राका (३४०० मि) आएल । भ्राकामे देखलियै एकटा सिनेमाक छायांकन भऽ रहल छलै । कने आगाँ बढ़लाक बाद दूटा रस्ता फूटै छै, एकटा रस्ता मनाङ (३५४०मि) गामदिस जाइत छै आ दोसर रस्ता खाङसार (३८०० मि) जाइत छै ।

हिमाली सभ्यताक परिचायक खाङसार आ मनाङ गाम

हमसभ दिनके करिब अढ़ाइ÷तीन बजे खाङसार पहुँचल रही । हवाक तीव्रता क्रमशः बढि रहल छलै । ई मुस्ताङ जाएबला रस्तामे मनाङ जिलाक अन्तिम बस्ती अछि । बुझि पड़ल जे ई अत्यन्त प्राचीन सभ्यतायुक्त बस्ती अछि । पाथरसँ बनल घरसभ । छोटछिन बस्ती । बस्तीमे छोटछोट घर । छोट बजार । मुदा ओतऽ लोककेँ नइँ देखलियै । गामसँ घुरैत काल एक महिलासँ भेट भेल । शायद भाषाक समस्याक कारण हुनकासँ संवाद नइँ भऽ सकल ।

ई स्थान तिलिचो जाए लेल सेहो महत्वपूर्ण स्थान छै । एतधरि गाडीसँ आएल जा सकैत छै मुदा एकर बाद पैदल तिलिचो जाए पड़ै छै । हमरासभकेँ तिलिचो नइँ जाएके छलै, तएँ हमसभ ओतसँ घुरि एलौँ । ओतसँ हमरालोकनि मनाङ गाम एलौँ आ ओतऽ एक होटलमे चाह—जलपान चललै । गाममे शायद लोकके अभाव छै मुदा होटलमे लोकके भीड देखलियै । ओहिमेसँ अधिकांश पर्यटक रहथि ।

ओतसँ हमरालोकनि करिब पाँच बजे विदा भेलौँ । साँझ भ गेल छलै । सूर्यदेव सनैसनः अस्ताचलदिस बढ़ि रहल छलथि । बुझाएल जे ठण्ढा बढ़ि रहल छलै आ हमरासभऽक गाड़ी सेहो चामेदिस बढ़ि रहल छलै ।
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[मुल लेखके वर्णविन्यास ILOVEMITHILA अनुसार संशोधन कएल गेल]

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